
Lyrics
लोरी सुनते-सुनते, लाडो, सोने तू लगे
पर माँ तेरी काली रातों में चंदा तके
ढोते-ढोते भार, ये काँधे नीचे को झुके
राही जैसे थक पड़े और साँस को रुके
जो मेरा थोड़ा भी था, तुझको वो पूरा दिया
सहती मैं चुप ही रही, पूछे तू, "क्या ही किया?"
हो, ना जाना अंबर, ना जानी दुनिया
परदों में जीवन ढला
लोरी सुनते-सुनते, लाडो, सोने तू लगे
पर माँ तेरी काली रातों में चंदा तके
था जो वादा चैन का, वो झूठा सा लगे
क्या करूँगी मैं भला, जो साथ तू ना मेरे
हर तमन्ना थी जो दिल में, चाहूँ तू जिए
ओ-हो, अँधियारे में जुगनू-सी रोशनी, ओ
Lyrics provided by LRCLIB.
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